गणेश जी की आरती | Ganesh Ji Ki Aarti

ganesh ji ki aarti

गणेश जी की आरती जो गणेश भगवान के प्रति भक्ति और समर्पण को दर्शाता है। जिसको भक्तों के द्वारा शुभ अवसर जैसे – गणेश चतुर्थी, विवाह, गृह प्रवेश और अन्य सामाजिक अवसरों पर की जाती है। यह आरती उनके जीवन में सुख और समृद्धि की कामना करती है और उन्हें नए कार्यों में सफलता प्राप्त करने के लिए शक्ति प्रदान करती है।

इस आरती में भगवान गणेश की उपासना की गई है, जो बुद्धि, शक्ति, और विद्या के देवता माने जाते हैं। इसके अलावा, इस आरती में गणेश भगवान की प्रसन्नता के लिए प्रार्थना की जाती है, ताकि वह अपने भक्तों को सदा ही खुश रखे किसी भी प्रकार की परेशानी न होने देना चाहिए।

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥1॥

एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी।
माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी॥
2

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
3

पान चढ़े फल चढ़े, और चढ़े मेवा।
लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा॥
4

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
5

अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया।
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया॥
6

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
7

‘सूर’ श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
8

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
9

दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी।
कामना को पूर्ण करो, जाऊं बलिहारी॥
10

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥11

भगवान गणेश की जय
पार्वती के लल्ला की जय

गणेश आरती विधि 

  1. तैयारी: आरती का पाठ करने से पहले, सबसे पहले आपको आरती के  सब सामान तो रख लेने  आरती को तैयार करने होंगे।अगर आपको आरती नहीं आ रही है तो आप कही से आरती को सून सकते है जैसे मोबाईल , लैपटॉप से भी  सून सकते है इससे आपका आरती पूजा भी पूरा हो जायेगा। 
  2. साफ़-सुथरा स्थान: आरती का पाठ करते समय, सुन्दर और स्वच्छ जगह पर बैठें। एक मंदिर या पूजा कक्ष में बैठकर आरती का पाठ करना उत्तम होता है।इससे गणेश भगवन प्रसन होते है। 
  3. पूजा सामग्री का एकत्रीकरण: आरती का पाठ करने के लिए सभी पूजा सामग्री जैसे कि दीपक, गंध, अक्षत, पुष्प, और प्रसाद को एकत्र करें।फिर जाकर पूजा को शुरू करना चाहिए। 
  4. आरती का पाठ: सभी सामग्री को सामान्यत: स्थापित करने के बाद, आरती के पाठ के लिए शुद्ध बुद्धि और शुद्ध भावना के साथ बैठें। आरती के लिरिक्स को ध्यान से पढ़ें और भगवान की आरती के समय उनकी दीर्घा और आत्मसमर्पण के साथ पाठ करें।
  5. आरती में दीपक दर्शन: आरती के पाठ के अंत में, दीपक को गर्म घी या तेल से जलाकर भगवान के समक्ष प्रस्तुत करें।और उनका दर्शन पूरा करे। 
  6. आरती का प्रसाद: आरती के पाठ के बाद, प्रसाद को भगवान को समर्पित करें और फिर उसे आप और अपने परिवार के बीच बाँटें।

इस आरती से होने वाले लाभ 

  • आत्मिक शांति: आरती का पाठ करने से हमारा मन और आत्मा शांत होती है। इससे हमारे आस-पास की चिंताओं और परेशानी का सामना करने की क्षमता बढ़ती है।
  • बुद्धि और विवेक का विकास: आरती के पाठ से हमारी बुद्धि और विवेक शक्ति में वृद्धि होती है। गणेश भगवान को प्रसन्न करने के लिए मंत्रों का उच्चारण करने से हमारे मन में शांति का विकास होता है।
  • सफलता की प्राप्ति: पाठ करने से हमारे कार्यों में सफलता की प्राप्ति होती है। कृपा से हमें संकटों और अवरोधों का सामना करने की शक्ति मिलती है।
  • समृद्धि और सुख की प्राप्ति: आरती का पाठ करने से हमें समृद्धि और सुख की प्राप्ति होती है। हमें धन, सम्पत्ति, और खुशियों की प्राप्ति में मदद करते हैं।

इस प्रकार, आरती करने से हमें आत्मिक शांति, बुद्धि का विकास, सफलता, आध्यात्मिक उन्नति, और समृद्धि की प्राप्ति होती है।

FAQ

आरती क्यों की जाती है?

आरती करने से भक्त के मन में शांति अनुभव होता है। यह भक्ति और समर्पण का एक रूप है जिससे भक्त का आध्यात्मिक उन्नति होता है।

आरती कितने समय करनी चाहिए?

आरती के पाठ के लाभ क्या हैं?

आरती कितनी बार करनी चाहिए?

आरती के मंत्र क्या हैं?